पत्नी और साली की हत्या में बर्खास्त ASI को दोहरी उम्रकैद
भोपाल के ऐशबाग दोहरे हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला, 56 चाकू वार और सीसीटीवी साक्ष्य बने मामले के अहम पहलू।
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐशबाग इलाके में पत्नी और साली की हत्या के बहुचर्चित मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश सुचिता श्रीवास्तव की अदालत ने बर्खास्त सहायक उप निरीक्षक (ASI) योगेश मरावी को दोनों हत्याओं के मामले में दोषी पाते हुए दोहरी आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त आर्म्स एक्ट के तहत तीन वर्ष के कारावास की सजा भी निर्धारित की गई है।
यह मामला 3 दिसंबर 2024 को हुए दोहरे हत्याकांड से जुड़ा है। घटना में योगेश मरावी की पत्नी विनीता मरावी और उसकी साली मेघा उइके की मौत हुई थी। अभियोजन के अनुसार, दोनों पर चाकू से कुल 56 वार किए गए थे।
करीब 16 महीने तक चली न्यायिक प्रक्रिया में अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश किए। सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों ने मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऐशबाग में 3 दिसंबर 2024 को हुई थी वारदात
भोपाल के ऐशबाग थाना क्षेत्र में 3 दिसंबर 2024 को यह दोहरा हत्याकांड सामने आया था। विनीता मरावी अपने पति योगेश मरावी से अलग रह रही थी। वह अपनी बहन मेघा उइके के साथ भोपाल में निवास कर रही थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों बहनें अपने भविष्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर आगे बढ़ रही थीं। मेघा उइके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी और उसने सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का लिखित चरण भी उत्तीर्ण कर लिया था।
लेकिन इस घटना ने दोनों बहनों की जिंदगी समाप्त कर दी और परिवार को गहरा आघात पहुंचाया।
साली की पढ़ाई में पत्नी की मदद से नाराज था योगेश
पुलिस जांच के अनुसार, योगेश मरावी इस बात से नाराज रहता था कि उसकी पत्नी विनीता अपनी बहन मेघा की पढ़ाई और अन्य खर्चों में आर्थिक सहायता करती थी।
अभियोजन के अनुसार, इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच तनाव था। जांच में इस रंजिश को हत्याकांड की पृष्ठभूमि से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू माना गया।
विनीता और मेघा के अलग रहने तथा मेघा की पढ़ाई में सहायता किए जाने की परिस्थितियों की भी जांच की गई थी।
घर में घुसकर दोनों बहनों पर किए थे 56 चाकू वार
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, योगेश मरावी 3 दिसंबर 2024 को विनीता के निवास पर पहुंचा और वहां पत्नी तथा साली पर चाकू से हमला कर दिया।
दोनों महिलाओं पर कुल 56 वार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। हमले में विनीता मरावी और मेघा उइके की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
इस घटना ने राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू विवादों के हिंसक रूप लेने को लेकर गंभीर चिंता पैदा की थी।
3 दिसंबर 2024 — ऐशबाग, भोपाल
मृतक: विनीता मरावी और मेघा उइके। मामले में दोषी ठहराया गया व्यक्ति: बर्खास्त एएसआई योगेश मरावी।
वारदात से पहले छुट्टी लेकर भोपाल पहुंचा था आरोपी
पुलिस जांच में सामने आया कि योगेश मरावी वारदात से पहले छुट्टी लेकर भोपाल आया था। वह एक कार से पहुंचा था और उसके साथ चालक भी मौजूद था।
बताया गया कि उसने अपनी पत्नी के फ्लैट के आसपास कार खड़ी की थी। इसके बाद वह निवास के भीतर गया। घटना के बाद वह वहां से निकल गया था।
जांच के दौरान उसके आने-जाने के समय और घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों को लेकर साक्ष्य जुटाए गए।
सीसीटीवी फुटेज से खुलीं हत्याकांड की कड़ियां
इस मामले की जांच में घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज महत्वपूर्ण साबित हुए।
पुलिस के अनुसार, फुटेज में योगेश मरावी का वारदात से पहले घर में प्रवेश करना और उसके बाद बाहर निकलना दिखाई दिया था।
इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच टीम ने उसकी गतिविधियों और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया। तकनीकी जानकारी के साथ अन्य साक्ष्यों का भी मिलान किया गया।
मंडला के नैनपुर क्षेत्र में पकड़ा गया था योगेश मरावी
दोहरे हत्याकांड के बाद योगेश मरावी भोपाल से निकल गया था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जानकारी के आधार पर उसकी तलाश शुरू की।
जांच टीम ने संदिग्ध की तस्वीरें आसपास के जिलों में भेजीं। इसके बाद मंडला जिले के नैनपुर थाना क्षेत्र की पिंडरई चौकी के पास कार रोककर योगेश मरावी और उसके चालक को पकड़ लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद योगेश मरावी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जेल में रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उसे पुलिस विभाग की सेवा से भी बर्खास्त किया जा चुका था।
11 गवाह और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 11 गवाह पेश किए। गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे।
अभियोजन ने घटनाक्रम, आरोपी की गतिविधियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
विशेष न्यायाधीश सुचिता श्रीवास्तव की अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद योगेश मरावी को दोनों महिलाओं की हत्या के मामले में दोषी ठहराया।
दोहरी उम्रकैद के साथ आर्म्स एक्ट में तीन साल की सजा
करीब 16 महीने चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने बर्खास्त एएसआई योगेश मरावी को दोहरी आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इसके अलावा आर्म्स एक्ट के तहत तीन वर्ष के कारावास की अतिरिक्त सजा भी निर्धारित की गई है।
दोहरी आजीवन कारावास का अर्थ दोनों हत्याओं के लिए आजीवन कारावास की सजाएं सुनाया जाना है। इन सजाओं के एक साथ या क्रमिक रूप से लागू होने की स्थिति संबंधित न्यायिक आदेश के प्रावधानों से स्पष्ट होगी।
दो बहनों की हत्या से जुड़े मामले का न्यायिक फैसला
भोपाल का यह दोहरा हत्याकांड पारिवारिक विवाद, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और पुलिस जांच में तकनीकी साक्ष्यों की भूमिका के कारण चर्चा में रहा था।
मेघा उइके प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी, जबकि विनीता अपनी बहन का सहयोग कर रही थी। दोनों की हत्या ने परिवार के साथ-साथ स्थानीय समाज को भी झकझोर दिया था।
अब अदालत ने मामले में दोषसिद्धि के बाद सजा सुनाई है। किसी भी संभावित अपील या आगे की न्यायिक कार्रवाई का निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा।
पत्नी विनीता मरावी और साली मेघा उइके की हत्या के मामले में बर्खास्त एएसआई योगेश मरावी को दोहरी उम्रकैद सुनाई गई है। 11 गवाहों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोषसिद्धि की। मामले में आर्म्स एक्ट के तहत तीन वर्ष की अतिरिक्त सजा भी दी गई है।



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