जानें पूजा विधि, मंत्र, प्रिय भोग और आरती
धर्म डेस्क। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। नवरात्रि के छठे दिन देवी के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। श्रद्धालु माता के चरणों में सुख, शांति, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।
मां कात्यायनी को साहस, शक्ति और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी उपासना भक्तों को भय और बाधाओं का सामना करने की प्रेरणा देती है। इस दिन माता को पीली मिठाई, पुष्प और शहद अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है।
- आराध्य देवी: मां कात्यायनी
- स्वरूप: चार भुजाएं और सिंह वाहन
- पूजा सामग्री: पुष्प, रोली, दीपक और नैवेद्य
- भोग: पीली मिठाई और शहद
- विशेष महत्व: शक्ति, साहस और आध्यात्मिक साधना
मां कात्यायनी का स्वरूप और धार्मिक महत्व
मां कात्यायनी को देवी दुर्गा का छठा स्वरूप माना जाता है। धार्मिक वर्णनों में उनका स्वरूप स्वर्ण के समान तेजस्वी बताया गया है। माता सिंह पर सवार रहती हैं और उनकी चार भुजाएं हैं। दाहिने हाथों में अभय और वर मुद्रा तथा बाईं ओर तलवार और कमल सुशोभित हैं।
अभय मुद्रा निर्भयता का प्रतीक है, जबकि वर मुद्रा भक्तों के कल्याण और आशीर्वाद की भावना दर्शाती है। तलवार को बुराई के विरुद्ध शक्ति तथा कमल को पवित्रता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक परंपराओं में मां कात्यायनी की पूजा को आत्मबल, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से जोड़ा जाता है।
मां कात्यायनी की पूजा विधि
नवरात्रि के छठे दिन श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके देवी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार की जा सकती है।
- सुबह स्नान करके पूजा स्थल की सफाई करें।
- चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां कात्यायनी की प्रतिमा स्थापित करें।
- कलश पूजन और देवी का ध्यान करें।
- माता के सामने घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- रोली, अक्षत, पुष्प और फूलों की माला अर्पित करें।
- परंपरा के अनुसार शहद, पान का पत्ता और मिठाई चढ़ाएं।
- मां कात्यायनी के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें और अंत में आरती उतारें।
मां कात्यायनी के विशेष मंत्र
मां कात्यायनी की आराधना में मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया गया है। भक्त अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
यह मंत्र विशेष रूप से विवाह संबंधी मंगलकामनाओं से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में प्रचलित है।
कंचनाभा वराभयं पद्मधरां मुकटोज्ज्वलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनी नमोस्तुते॥
कुछ धार्मिक परंपराओं में मंत्र का 108 बार जाप करने का विधान है। मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखकर देवी का ध्यान किया जाता है।
मां कात्यायनी को क्या लगाएं भोग?
नवरात्रि के छठे दिन माता को पीले रंग की मिठाइयां अर्पित करने की परंपरा है। श्रद्धालु बेसन का हलवा, पीली बर्फी या अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्य सात्विक मिठाई का भोग लगा सकते हैं।
मां कात्यायनी को शहद अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं में शहद को मधुरता और मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है। पूजा के बाद प्रसाद परिवार और श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।
मां कात्यायनी की आरती
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा॥
कई नाम हैं, कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी॥
जय जगमाता, जग की महारानी॥
अपना नाम जपाने वाली।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो॥
ध्यान कात्यायनी का धरियो।
हर संकट को दूर करेगी॥
भंडारे भरपूर करेगी।
जो भी मां को भक्त पुकारे॥
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी॥
जय जगमाता, जग की महारानी॥
भक्ति के साथ शक्ति और साहस का संदेश
मां कात्यायनी की आराधना केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। उनका स्वरूप भक्तों को साहस, संयम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। माता की पूजा में श्रद्धा, स्वच्छता और एकाग्रता को महत्वपूर्ण माना जाता है।
भक्त माता के चरणों में अपने परिवार की सुख-शांति, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और जीवन में सकारात्मकता की कामना करते हैं।
मां की आराधना से जीवन में साहस, शांति और मंगल की कामना करें।



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