आतंकी हमले जैसी काल्पनिक स्थिति पर तीन घंटे चली मॉक ड्रिल, सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों का परीक्षण
उज्जैन (मध्य प्रदेश)। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में गुरुवार, 22 अक्टूबर की देर रात राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के कमांडो ने व्यापक सुरक्षा अभ्यास किया। इस दौरान मंदिर परिसर और महाकाल लोक के आसपास सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय नजर आईं।
संभावित आतंकी हमले जैसी काल्पनिक स्थिति से निपटने के लिए आयोजित इस मॉक ड्रिल में लगभग 150 NSG कमांडो ने हिस्सा लिया। अभ्यास का उद्देश्य मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई की क्षमता को परखना था।
रात करीब 11 बजे शुरू हुआ यह अभ्यास 23 अक्टूबर की तड़के लगभग 2 बजे तक चला। इस दौरान मंदिर की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया गया।
स्थान: महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन
तारीख: 22-23 अक्टूबर 2026
समय: रात 11 बजे से तड़के 2 बजे तक
अवधि: लगभग 3 घंटे
NSG जवान: लगभग 150
उद्देश्य: आतंकी हमले जैसी काल्पनिक स्थिति में सुरक्षा तैयारियों की जांच
आतंकी हमले जैसी स्थिति बनाकर किया अभ्यास
सुरक्षा अभ्यास से पहले संबंधित एजेंसियों ने टेबल-टॉप एक्सरसाइज के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की रणनीति पर चर्चा की।
इसके बाद मंदिर परिसर में संभावित आतंकी घुसपैठ जैसी काल्पनिक स्थिति बनाकर सुरक्षा बलों की कार्रवाई का पूर्वाभ्यास किया गया।
कमांडो ने काल्पनिक खतरों से निपटने, संदिग्ध गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देने और आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का अभ्यास किया।
यह किसी वास्तविक आतंकी हमले की घटना नहीं थी। मंदिर की सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए काल्पनिक परिस्थिति में मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी।
रात 11 बजे से 2 बजे तक चला सुरक्षा ऑपरेशन
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की मुंबई टीम के कमांडो सुरक्षा उपकरणों और बुलेटप्रूफ वाहनों के साथ अभ्यास में शामिल हुए। महाकाल लोक के नंदी द्वार क्षेत्र में जवानों को आवश्यक ब्रीफिंग दी गई।
इसके बाद महाकाल लोक के मानसरोवर क्षेत्र से त्रिनेत्र कंट्रोल रूम के आसपास सुरक्षा संबंधी अभ्यास किया गया।
इस दौरान आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया, प्रवेश और निकास मार्गों की व्यवस्था तथा बचाव कार्यों की तैयारियों का आकलन हुआ।
NSG, ATS और स्थानीय पुलिस ने मिलकर संभाला मोर्चा
संयुक्त सुरक्षा अभ्यास में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के अलावा एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS), स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन की भागीदारी रही।
अभ्यास के दौरान विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था को परखा गया।
आपात स्थिति में एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी के सहयोग तथा संयुक्त प्रतिक्रिया की क्षमता भी अभ्यास का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
- संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने का पूर्वाभ्यास।
- सुरक्षा बलों के रिस्पॉन्स टाइम का आकलन।
- आपात स्थिति में श्रद्धालुओं की सुरक्षित निकासी।
- विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल।
- आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता की जांच।
रिस्पॉन्स टाइम और सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण
मॉक ड्रिल में यह आकलन किया गया कि किसी संभावित खतरे की स्थिति में सुरक्षा बल कितनी तेजी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
मंदिर परिसर में सुरक्षा घेरे, आपातकालीन निकासी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को भी परखा गया।
इस तरह के अभ्यास सुरक्षा व्यवस्था में संभावित कमियों की पहचान करने और आपात स्थितियों के लिए बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने में मदद करते हैं।
एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने बताया अभ्यास का उद्देश्य
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उज्जैन के एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
उन्होंने सुरक्षा तैयारियों को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया कि ऐसे अभ्यास से आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई और आपसी तालमेल का आकलन किया जा सकता है।
सिंहस्थ 2028 से पहले सुरक्षा तैयारियों पर विशेष ध्यान
उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए सुरक्षा तैयारियों का विशेष महत्व है।
महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल लोक में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे में किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों का समन्वय और तत्परता महत्वपूर्ण है।
मंदिर परिसर में इससे पहले भी सुरक्षा संबंधी मॉक ड्रिल आयोजित की जा चुकी हैं।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में लगभग तीन घंटे चली NSG की एंटी टेररिस्ट मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी वास्तविक खतरे की सूचना देना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों का परीक्षण करना था। अभ्यास के माध्यम से आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के तालमेल का आकलन किया गया।



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