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सिवनी मालवा में जुए के फड़ों का जाल? कई मोहल्लों में संचालन के आरोप, पुलिस की कार्रवाई और कथित संरक्षण पर उठे सवाल

मध्यप्रदेश के सिवनी मालवा में कथित जुए के फड़ों के संचालन और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार गाड़री मोहल्ला, गोटियापुरा, झकलाय नाका, बानापुरा और दो पीपलबाबा कॉलोनी सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में जुए की गतिविधियों की शिकायतें मिल रही हैं। आरोप है कि पुलिस के पहुंचने से पहले जुआरी मौके से निकल जाते हैं। क्षेत्र में कथित पुलिस संरक्षण और एक कार्रवाई से जुड़े 3.50 लाख रुपये के लेन-देन की चर्चा भी है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा थोटा से गोपनीय जांच और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

सिवनी मालवा में जुए के फड़ों का जाल? कई मोहल्लों में संचालन के आरोप, पुलिस की कार्रवाई और कथित संरक्षण पर उठे सवाल
दैनिक रेवाँचल टाईम्स | सिवनी मालवा
सिवनी मालवा में जुए के फड़ों का जाल? पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
कई मोहल्लों में जुआ खिलाने के आरोप, कथित पुलिस संरक्षण और साढ़े तीन लाख के लेन-देन की चर्चा

 सिवनी मालवा। नगर के विभिन्न मोहल्लों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कथित तौर पर जुए के फड़ों का संचालन होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई की सूचना मिलते ही जुआ खेलने वाले मौके से निकल जाते हैं। वहीं पुलिस की ओर से यह बात कही जाती है कि सूचना मिलने पर टीम मौके पर भेजी जाती है, लेकिन वहां कोई नहीं मिलता।

इसी बीच क्षेत्र में कथित पुलिस संरक्षण और एक कार्रवाई के दौरान 3.50 लाख रुपये के लेन-देन की चर्चाओं ने सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा थोटा से पूरे मामले की गोपनीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

कार्रवाई से पहले कैसे खाली हो जाते हैं जुए के अड्डे?

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब भी जुए की गतिविधियों की सूचना पुलिस तक पहुंचती है, तो कार्रवाई से पहले संबंधित लोग मौके से कैसे निकल जाते हैं? क्या यह महज संयोग है या शिकायतों की जांच और कार्रवाई की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है?

जुए के फड़ों पर रोक लगाने को लेकर सवाल

सिवनी मालवा में लंबे समय से जुए के फड़ों के संचालन को लेकर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि पुलिस की कार्रवाई के बाद कुछ समय तक कथित गतिविधियां बंद रहती हैं, लेकिन बाद में फिर शुरू हो जाती हैं।

ऐसे में नए थाना प्रभारी के आने के बाद भी यदि शिकायतों में बताई जा रही स्थिति बनी हुई है, तो पुलिस की निगरानी व्यवस्था और कार्रवाई की रणनीति की समीक्षा आवश्यक है।

दीपावली के आसपास जुए की संभावित गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता भी बढ़ी हुई है। नागरिकों का कहना है कि पुलिस को शिकायतों का सत्यापन कर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

गाड़री मोहल्ले से बानापुरा तक जुआ चलने के आरोप

नगर के गाड़री मोहल्ला, गोटियापुरा, झकलाय नाका, बानापुरा मोहल्ला और दो पीपलबाबा कॉलोनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में कथित तौर पर जुए के फड़ संचालित होने की शिकायतें की जा रही हैं।

स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि जुए की गतिविधियां केवल नगरीय क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आसपास के गांवों में भी इस प्रकार की गतिविधियों की शिकायतें सामने आ रही हैं।

हालांकि इन स्थानों पर जुआ संचालित होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुलिस द्वारा संबंधित स्थानों की निगरानी और शिकायतों का तथ्यात्मक सत्यापन करना जरूरी है।

इन क्षेत्रों को लेकर शिकायतें

गाड़री मोहल्ला, गोटियापुरा, झकलाय नाका, बानापुरा मोहल्ला, दो पीपलबाबा कॉलोनी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र।

इन स्थानों के संबंध में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि शेष है।

कथित पुलिस संरक्षण और सांठगांठ की चर्चाएं

क्षेत्र में कथित तौर पर जुए के फड़ संचालित करने वाले कुछ लोगों को पुलिस संरक्षण मिलने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि दीपावली के दौरान जुए का कारोबार बढ़ने की संभावना है और कथित संचालकों को पुलिस कार्रवाई का भय नहीं है।

कुछ लोगों द्वारा पुलिस के साथ कथित लेन-देन और संरक्षण मिलने की बातें भी कही जा रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है। किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता के संबंध में निष्कर्ष जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

साढ़े तीन लाख के कथित लेन-देन पर भी सवाल

क्षेत्र में जुए से संबंधित एक पुलिस कार्रवाई के दौरान लगभग 3 लाख 50 हजार रुपये के कथित लेन-देन की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कथित लेन-देन कब हुआ, किन लोगों के बीच हुआ और इसके समर्थन में कोई दस्तावेज या अन्य प्रमाण उपलब्ध हैं अथवा नहीं।

ऐसी स्थिति में इस दावे की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविकता सामने आ सके और किसी व्यक्ति या अधिकारी के संबंध में बिना प्रमाण के निष्कर्ष न निकाले जाएं।

आरोपों की पुष्टि जरूरी

पुलिस संरक्षण और 3.50 लाख रुपये के कथित लेन-देन संबंधी दावे फिलहाल अपुष्ट हैं। संबंधित शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही इनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

सूचना पर पहुंचती है पुलिस, मौके पर नहीं मिलते जुआरी

स्थानीय लोगों के अनुसार जुए के फड़ों की सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर भेजे जाने की बात कही जाती है, लेकिन कार्रवाई के समय वहां कोई व्यक्ति नहीं मिलता।

इस स्थिति को लेकर नागरिकों ने सवाल उठाया है कि यदि लगातार शिकायतें मिल रही हैं, तो उनकी जांच के लिए क्या निगरानी व्यवस्था अपनाई जा रही है और शिकायतों का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है?

शिकायतों की वास्तविकता जानने के लिए सूचना मिलने का समय, पुलिस टीम की रवानगी, मौके पर पहुंचने की स्थिति और कार्रवाई संबंधी अभिलेखों का परीक्षण उपयोगी हो सकता है।

एसपी साईं कृष्णा थोटा से गोपनीय जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा थोटा से जुए के फड़ों के कथित संचालन, पुलिस संरक्षण संबंधी चर्चाओं और 3.50 लाख रुपये के कथित लेन-देन की गोपनीय तथा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

नागरिकों का कहना है कि शिकायतों की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। यदि अवैध गतिविधियां संचालित होने या किसी स्तर पर संरक्षण दिए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर निगाहें

सिवनी मालवा में कथित जुए के फड़ों के संचालन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नागरिकों को पुलिस प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद है। शिकायतों की निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक सत्यापन से ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों की वास्तविक स्थिति क्या है तथा पुलिस संरक्षण और लेन-देन की चर्चाओं में कितनी सच्चाई है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायतों की वास्तविकता सामने लाने और संभावित अवैध जुए की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पुलिस प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।

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लेखक

Arti Lodhi

Editor In Chief

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