सफाईकर्मी की हाजिरी सुधारने और वेतन बनवाने के नाम पर 3 हजार रुपये मांगने का आरोप
सतना। मध्य प्रदेश के सतना नगर निगम में कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। सफाई कर्मचारी की काटी गई हाजिरी सही करने और वेतन बनवाने के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत पर लोकायुक्त रीवा की टीम ने कार्रवाई की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार 18 अक्टूबर को बिरला हॉस्पिटल के सामने नगर निगम के सुपरवाइजर बालकृष्ण आदिवासी को 2 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
यह कार्रवाई नगर निगम के वार्ड क्रमांक 15 में पदस्थ सफाई कर्मचारी राजकिशोर समुंद्रे की शिकायत पर की गई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि सितंबर महीने में नियमित रूप से काम करने के बावजूद उसकी उपस्थिति मस्टर रोल में कम दर्ज की गई थी। जब उसने अपनी हाजिरी सही करने और वेतन बनवाने का अनुरोध किया, तो सुपरवाइजर ने इसके बदले रुपये मांगे।
25 दिन काम किया, लेकिन मस्टर रोल में कम दर्ज हुई हाजिरी
प्राप्त विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता राजकिशोर समुंद्रे सतना के महात्मा गांधी वार्ड का निवासी है और नगर निगम के वार्ड क्रमांक 15 में सफाई कर्मचारी के रूप में पदस्थ है।
राजकिशोर का आरोप है कि उसने सितंबर महीने में 25 दिन अपनी ड्यूटी की थी, लेकिन संबंधित सुपरवाइजर बालकृष्ण आदिवासी ने मस्टर रोल में उसकी उपस्थिति कम दर्ज कर दी। इससे उसके वेतन पर असर पड़ने की स्थिति बन गई।
जब सफाई कर्मचारी ने अपनी वास्तविक उपस्थिति दर्ज करने और वेतन तैयार करवाने की बात कही, तो कथित तौर पर उससे तीन हजार रुपये की मांग की गई।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसे अपने काम के दिनों की हाजिरी सही करवाने के लिए रिश्वत देने का दबाव झेलना पड़ रहा था। इसके बाद उसने मामले की शिकायत लोकायुक्त रीवा से करने का निर्णय लिया।
लोकायुक्त में शिकायत, गोपनीय सत्यापन के दौरान एक हजार रुपये लेने का आरोप
सफाई कर्मचारी राजकिशोर समुंद्रे ने लोकायुक्त रीवा कार्यालय पहुंचकर सुपरवाइजर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में हाजिरी सुधारने और वेतन बनवाने के बदले तीन हजार रुपये की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उसका गोपनीय सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान कथित रिश्वत की मांग की पुष्टि होने की जानकारी दी गई है।
बताया गया है कि सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान ही आरोपी सुपरवाइजर एक हजार रुपये ले चुका था। इसके बाद शेष दो हजार रुपये की राशि लेने के लिए अगली मुलाकात तय हुई।
बिरला हॉस्पिटल के सामने बिछाया लोकायुक्त ने जाल
रिश्वत की मांग के सत्यापन के बाद लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में विशेष ट्रैप टीम गठित की गई। कार्रवाई के लिए सतना में बिरला हॉस्पिटल के सामने का स्थान निर्धारित किया गया।
रविवार, 18 अक्टूबर को तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता राजकिशोर समुंद्रे आरोपी सुपरवाइजर से मिलने पहुंचा। इस दौरान लोकायुक्त की टीम आसपास निगरानी कर रही थी।
प्राप्त विवरण के मुताबिक, जैसे ही शिकायतकर्ता ने सुपरवाइजर बालकृष्ण आदिवासी को शेष दो हजार रुपये सौंपे, पहले से तैयार लोकायुक्त टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया।
यह ट्रैप कार्रवाई निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया के नेतृत्व में किए जाने की जानकारी है।
रिश्वत की रकम बरामद, हाथ धुलवाकर किया रासायनिक परीक्षण
लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान कथित रिश्वत के रूप में दी गई दो हजार रुपये की राशि बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके बाद निर्धारित ट्रैप प्रक्रिया के तहत आरोपी के हाथ धुलवाकर रासायनिक परीक्षण किया गया। प्राप्त विवरण के अनुसार, परीक्षण में रंग परिवर्तन की पुष्टि हुई।
इस प्रकार के परीक्षण का उपयोग ट्रैप कार्रवाई में चिह्नित नोटों के संपर्क से संबंधित साक्ष्य जुटाने के लिए किया जाता है। हालांकि, किसी आरोपी का दोष अंतिम रूप से न्यायालय में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही निर्धारित होता है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत प्रकरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी सुपरवाइजर बालकृष्ण आदिवासी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संशोधित धारा 7 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।
यह धारा लोक सेवक द्वारा अनुचित लाभ प्राप्त करने से संबंधित अपराधों का प्रावधान करती है। मामले में शिकायत, सत्यापन, ट्रैप कार्रवाई और बरामदगी से संबंधित दस्तावेज जांच का हिस्सा होंगे।
आगे की जांच में संबंधित मस्टर रोल, उपस्थिति रिकॉर्ड और वेतन तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
सफाई कर्मचारियों की हाजिरी और वेतन व्यवस्था पर सवाल
इस प्रकरण ने नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने और वेतन तैयार करने की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
शिकायतकर्ता के आरोपों के अनुसार, वास्तविक कामकाज के दिनों और मस्टर रोल में दर्ज उपस्थिति के बीच अंतर था। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह जानना भी जरूरी होगा कि हाजिरी में परिवर्तन करने और वेतन संबंधी रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया किस स्तर पर नियंत्रित होती थी।
नगर निगम जैसे सार्वजनिक संस्थानों में कर्मचारियों की उपस्थिति और वेतन भुगतान का पारदर्शी रिकॉर्ड होना आवश्यक है, ताकि किसी कर्मचारी को अपने वैधानिक भुगतान के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
शिकायतकर्ता: राजकिशोर समुंद्रे, सफाई कर्मचारी
पदस्थापना: वार्ड क्रमांक 15, सतना नगर निगम
आरोपी: बालकृष्ण आदिवासी, सुपरवाइजर
शिकायत: हाजिरी सुधारने और वेतन बनवाने के बदले रिश्वत की मांग
ट्रैप स्थान: बिरला हॉस्पिटल के सामने, सतना
कार्रवाई: लोकायुक्त रीवा
ट्रैप टीम का नेतृत्व: निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया
सतना नगर निगम के सुपरवाइजर के खिलाफ हुई इस ट्रैप कार्रवाई में सफाई कर्मचारी की हाजिरी और वेतन बनवाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप केंद्र में है। लोकायुक्त पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी दी है। आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।



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