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मंदसौर में दो बच्चों की संदिग्ध मौत से हड़कंप, 200 ग्रामीणों की स्क्रीनिंग में 25 में मिले मलेरिया के लक्षण

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के छोटी कोटड़ी गांव में दो बच्चों की संदिग्ध मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच अभियान तेज कर दिया है। करीब 200 ग्रामीणों की स्क्रीनिंग में 25 लोगों में मलेरिया जैसे लक्षण मिले हैं। गांव में आठ टीमें तैनात हैं। बच्चों की मौत का वास्तविक कारण अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा।

मंदसौर में दो बच्चों की संदिग्ध मौत से हड़कंप, 200 ग्रामीणों की स्क्रीनिंग में 25 में मिले मलेरिया के लक्षण
MADHYA PRADESH | HEALTH ALERT

दो बच्चों की संदिग्ध मौत के बाद छोटी कोटड़ी गांव में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

200 लोगों की स्क्रीनिंग, 25 में मलेरिया के लक्षण; आठ टीमें कर रहीं घर-घर जांच

मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में दो बच्चों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। ग्राम छोटी कोटड़ी में बच्चों की मौत के बाद व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जा रहा है। दोनों बच्चों में शुरुआती तौर पर मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई देने और प्लेटलेट्स कम होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उनकी मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।

जिला प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें गांव में पहुंची हैं। अधिकारियों की निगरानी में ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच, बीमार व्यक्तियों की पहचान और आवश्यक उपचार की व्यवस्था की जा रही है।

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बच्चों की संदिग्ध मौत
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ग्रामीणों की स्क्रीनिंग
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मलेरिया जैसे लक्षण
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जांच टीमें तैनात

दो बच्चों की मौत के बाद प्रशासन में हड़कंप

छोटी कोटड़ी गांव में दो बच्चों की मौत की सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने स्वास्थ्य संबंधी स्थिति की समीक्षा शुरू की। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि दोनों बच्चों में मलेरिया से मिलते-जुलते लक्षण थे। उनके प्लेटलेट्स भी कम पाए गए थे।

इन परिस्थितियों के चलते स्वास्थ्य विभाग ने गांव में अन्य लोगों के बीमार होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए जांच अभियान शुरू किया। प्रशासन का प्रयास है कि बुखार या अन्य लक्षण वाले व्यक्तियों की समय रहते पहचान कर उनका उपचार कराया जा सके।

मौत की वजह की पुष्टि अभी बाकी

बच्चों में प्लेटलेट्स की कमी और मलेरिया जैसे लक्षण मिलने की जानकारी है। इससे यह साबित नहीं होता कि उनकी मौत मलेरिया के कारण हुई। वास्तविक वजह अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

200 लोगों की जांच, 25 में मलेरिया के लक्षण

स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव में चलाए जा रहे अभियान के दौरान अब तक करीब 200 ग्रामीणों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें लगभग 25 व्यक्तियों में मलेरिया जैसे लक्षण पाए जाने की जानकारी सामने आई है।

स्वास्थ्य विभाग संबंधित व्यक्तियों की आगे की जांच और उपचार की व्यवस्था कर रहा है। कुछ मरीजों का भानपुरा में इलाज चल रहा है, जबकि आवश्यकता के अनुसार कुछ मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई देना और जांच में मलेरिया संक्रमण की पुष्टि होना अलग-अलग बातें हैं। संबंधित जांच रिपोर्ट से ही संक्रमित व्यक्तियों की वास्तविक संख्या निर्धारित की जा सकेगी।

गांव में आठ टीमें, घर-घर पहुंच रहा स्वास्थ्य अमला

जिला प्रशासन के निर्देश पर गांव में कुल आठ टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों में स्वास्थ्य विभाग के साथ महिला एवं बाल विकास और राजस्व विभाग का अमला भी शामिल है।

टीमें घर-घर जाकर लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटा रही हैं। जिन ग्रामीणों को बुखार, कमजोरी, ठंड लगना या अन्य संदिग्ध लक्षण हैं, उन्हें स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सलाह दी जा रही है।

एसडीएम सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने भी गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है। अभियान का उद्देश्य बीमार लोगों की जल्द पहचान करना और उपचार में देरी को रोकना है।

जल स्रोतों से लिए जा रहे पानी के नमूने

स्वास्थ्य जांच के साथ गांव में सार्वजनिक जल स्रोतों की गुणवत्ता की पड़ताल भी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग और ग्राम पंचायत की टीमें पानी के नमूने एकत्र कर रही हैं, ताकि उनकी गुणवत्ता की जांच की जा सके।

पानी के नमूनों की जांच स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी व्यापक निगरानी का हिस्सा है। हालांकि, मलेरिया दूषित पानी पीने से नहीं, बल्कि संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है।

इसलिए प्रशासन के लिए जल गुणवत्ता की निगरानी के साथ मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान और नियंत्रण भी महत्वपूर्ण है।

मच्छरों की रोकथाम के लिए कीटनाशक छिड़काव

गांव में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए आवश्यक उपाय कर रहे हैं।

ग्रामीणों को अपने घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, पानी की टंकियों को ढककर रखने तथा मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी जा सकती है।

स्वास्थ्य विभाग का विशेष ध्यान ऐसे लोगों पर है, जिनमें बुखार या अन्य लक्षण सामने आ रहे हैं। समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है।

बुखार और प्लेटलेट्स कम होने पर क्या करें?

मलेरिया में बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स भी कम हो सकते हैं, लेकिन प्लेटलेट्स की कमी अकेले मलेरिया की पुष्टि नहीं करती।

यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार हो, तो उसे चिकित्सक से संपर्क कर आवश्यक जांच करानी चाहिए। बिना जांच के बीमारी का अनुमान लगाकर दवा लेना उचित नहीं है।

ग्रामीणों के लिए जरूरी सावधानियां
  • बुखार या ठंड लगने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
  • रात में मच्छरदानी का उपयोग करें।
  • घर के आसपास जमा पानी हटाएं और पानी के पात्र ढककर रखें।
  • चिकित्सक की सलाह के बिना मलेरिया की दवाएं न लें।
  • बेहोशी, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी होने पर तत्काल अस्पताल जाएं।

अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार

दो बच्चों की संदिग्ध मौत के बाद छोटी कोटड़ी गांव में प्रशासनिक और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां तेज हो गई हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार स्क्रीनिंग कर रही हैं और लक्षण वाले लोगों को उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

फिलहाल बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत का संबंध मलेरिया या किसी अन्य चिकित्सकीय कारण से था।

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जारी

मंदसौर के छोटी कोटड़ी गांव में दो बच्चों की संदिग्ध मौत के बाद आठ टीमें तैनात हैं। करीब 200 लोगों की स्क्रीनिंग में 25 में मलेरिया जैसे लक्षण मिले हैं। मरीजों का उपचार और गांव में बचाव अभियान जारी है। बच्चों की मौत का कारण अंतिम जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगा।

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लेखक

Arti Lodhi

Editor In Chief

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