‘सवर्ण आरक्षण’ के खिलाफ NGO ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका

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नई दिल्ली: लोकसभा और राज्यसभा में सवर्णों को आरक्षण देने वाला बिल भले ही पास हो गया हो। अब सुप्रीम कोर्टमें एक गैर सरकारी संगठन ने इस बिल को चुनौती दी है। याचिका में बिल के बारे में कहा गया है कि ये संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है।

बता दें कि बहस के दौरान कई नेताओं ने सरकार को चेताया था कि इस बिल का सुप्रीम कोर्ट में जाना तय है। जहां कोर्ट में जिरह के दौरान बिल के प्रावधान टिक नहीं पाएंगे। इन नेताओं में AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल थे। वहीं माना जा रहा है कि बिल के खिलाफ कई स्वतंत्र लोग और राजनेता सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं।

संविधान (103 वां संशोधन) विधेयक, 2019 के खिलाफ याचिका ‘यूथ फॉर इक्वेलिटी’ नाम की संस्था की तरफ से दायर किया गया है। NGO प्रमुख डॉ कौशल कांत मिश्रा इस याचिका में पिटीशनर हैं। मिश्रा के मुताबिक संविधान संशोधन बिल सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन करता है।

बता दें कि संविधान संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलनी है। जिसके बाद ये कानून का रूप ले लेगा। चूंकि ये बिल संघीय ढांचे को प्रभावित नहीं करता है, लिजाहा राज्यों की विधानसभाओं से इसके बारे में अनुमोदन लेने की जरूरत नहीं है।

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