महाअष्टमी 18 या 19 अक्टूबर? जानिए मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन की महत्वपूर्ण बातें
अष्टमी तिथि के समय, कन्या पूजन की परंपरा और उपहारों को लेकर जानिए ज्योतिषाचार्य की राय
नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। नवरात्रि के आठवें दिन को महाअष्टमी कहा जाता है और इस दिन देवी दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की पूजा से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि को लेकर श्रद्धालुओं में 18 और 19 अक्टूबर के बीच असमंजस बना हुआ है। विशेष रूप से कन्या पूजन करने वाले परिवार यह जानना चाहते हैं कि किस दिन व्रत रखना और किस दिन कन्याओं को भोजन कराना उचित रहेगा।
ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव ने आईएएनएस से बातचीत में अष्टमी और नवमी तिथि के समय तथा कन्या पूजन के विकल्पों की जानकारी दी है।
शारदीय नवरात्रि 2026 में अष्टमी कब है?
ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव के अनुसार, इस बार सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को पूरे दिन रहेगी, जबकि 18 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 36 मिनट पर अष्टमी तिथि शुरू होगी। अष्टमी का समापन 19 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 36 मिनट पर बताया गया है। इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी।
ऐसे में अष्टमी और नवमी के पूजन को लेकर अलग-अलग परंपराओं का पालन करने वाले श्रद्धालुओं के सामने दो विकल्प हैं। कुछ परिवार अष्टमी तिथि शुरू होने के बाद पूजन करते हैं, जबकि कुछ परिवार उदया तिथि या अपनी कुल परंपरा के अनुसार पूजन करते हैं।
18 अक्टूबर 2026: सुबह 11:36 बजे अष्टमी तिथि प्रारंभ होने की जानकारी दी गई है।
19 अक्टूबर 2026: सुबह 7:36 बजे अष्टमी समाप्त होकर नवमी शुरू होने की जानकारी दी गई है।
नोट: ये समय उपलब्ध ज्योतिषीय विवरण पर आधारित हैं। स्थानीय पंचांग, स्थान और परंपरा के अनुसार पूजन का निर्णय करें।
18 अक्टूबर को करें या 19 अक्टूबर को कन्या पूजन?
ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव के अनुसार, जिन परिवारों में सप्तमी का व्रत रखकर अष्टमी को कन्या पूजन करने की परंपरा है, वे 17 अक्टूबर को व्रत रखकर 18 अक्टूबर को अष्टमी तिथि प्रारंभ होने के बाद कन्या पूजन कर सकते हैं।
वहीं, जो श्रद्धालु 18 अक्टूबर को व्रत रखते हैं, वे अपनी परंपरा के अनुसार 19 अक्टूबर को कन्या पूजन कर सकते हैं।
उन्होंने 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी के कन्या पूजन का विकल्प भी बताया है। हालांकि, अष्टमी की उदया तिथि, नवमी की पूजा और व्रत पारण के नियम अलग-अलग पंचांग पद्धतियों में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से समय की पुष्टि करनी चाहिए।
मां महागौरी का स्वरूप और धार्मिक महत्व
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। देवी के इस स्वरूप को पवित्रता, करुणा, शांति और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक वर्णनों में मां महागौरी का वर्ण अत्यंत उज्ज्वल बताया गया है।
मां महागौरी की चार भुजाएं मानी जाती हैं। उनके हाथों में त्रिशूल और डमरू का वर्णन मिलता है, जबकि अन्य हाथ अभय और वरद मुद्रा में दर्शाए जाते हैं। उनका वाहन वृषभ माना जाता है।
मान्यता है कि मां महागौरी की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और भक्तों को मानसिक शांति तथा मंगलमय जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
महाअष्टमी पर कन्या पूजन कैसे करें?
कन्या पूजन नवरात्रि की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। कई परिवारों में छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका सम्मानपूर्वक पूजन किया जाता है। कुछ परंपराओं में एक बालक को भी भोजन कराया जाता है, जिसे बटुक या भैरव स्वरूप माना जाता है।
पूजा के दिन घर और पूजा स्थल की सफाई करें। कन्याओं को आदरपूर्वक आमंत्रित करें और परिवार की परंपरा के अनुसार उनका पूजन करें।
इसके बाद उन्हें स्वच्छ और पौष्टिक भोजन कराएं। कई स्थानों पर हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद बनाने की परंपरा है। भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा या उपयोगी उपहार देकर सम्मानपूर्वक विदा किया जाता है।
इस दौरान बच्चों की सुविधा, स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता और उनकी व्यक्तिगत पसंद का ध्यान रखना भी जरूरी है।
इस बार कन्याओं को क्या दें उपहार?
नवरात्रि में कन्या पूजन के दौरान उपहार देने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और पारिवारिक रीति-रिवाजों के अनुसार उपहार चुन सकते हैं।
वस्त्र: कन्याओं को नए कपड़े, दुपट्टा या उनकी जरूरत के अनुसार वस्त्र दिए जा सकते हैं।
शैक्षणिक सामग्री: कॉपी, पेंसिल, रंगों का सेट, किताबें और स्कूल से संबंधित उपयोगी सामान अच्छे विकल्प हैं।
खिलौने: बच्चों की उम्र के अनुसार सुरक्षित और उपयोगी खिलौने दिए जा सकते हैं।
दक्षिणा: परिवार की परंपरा के अनुसार धनराशि भी दी जा सकती है।
श्रृंगार सामग्री: परंपरा और बच्चों की उम्र को ध्यान में रखते हुए हेयरबैंड, क्लचर, रिबन या अन्य उपयुक्त सामान दिया जा सकता है।
शुक्र अस्त होने पर श्रृंगार सामग्री देने की सलाह
ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव के अनुसार, इस बार शुक्र अस्त होने की स्थिति को देखते हुए कन्या पूजन में श्रृंगार और फैशन से जुड़ी सामग्री उपहार में देने का विशेष महत्व बताया गया है।
उनका कहना है कि ज्योतिषीय मान्यताओं में शुक्र को सुख-सुविधा, सौंदर्य और वैभव से जोड़कर देखा जाता है। इसी आधार पर उन्होंने कन्याओं को श्रृंगार संबंधी उपहार देने की सलाह दी है।
हालांकि, शुक्र अस्त होने से आर्थिक नुकसान होने या विशेष उपहार देने से धन प्राप्ति होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ये धार्मिक-ज्योतिषीय मान्यताएं हैं, जिनका पालन श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार कर सकते हैं।
उपहार देते समय इन बातों का रखें ध्यान
कन्या पूजन का मूल भाव बालिकाओं का सम्मान और उनके प्रति स्नेह व्यक्त करना है। इसलिए महंगे उपहार देना आवश्यक नहीं है।
बच्चों की उम्र के अनुसार सुरक्षित सामान चुनना चाहिए। छोटे बच्चों को ऐसी वस्तुएं न दें जिनमें छोटे अलग होने वाले हिस्से हों। तेज सुगंध वाले परफ्यूम या त्वचा पर इस्तेमाल होने वाले सौंदर्य उत्पाद भी बिना आवश्यकता के देने से बचना बेहतर है।
उपहार ऐसा हो जो बच्चे के लिए उपयोगी हो और जिसे वह खुशी से इस्तेमाल कर सके।
महाअष्टमी की पूजा में श्रद्धा और परंपरा का महत्व
नवरात्रि के दौरान भक्त मां दुर्गा की आराधना, मंत्र जाप, आरती और व्रत के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। महाअष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन को भी विशेष महत्व दिया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि कन्याओं का सम्मान और उन्हें भोजन कराने से देवी की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही यह परंपरा समाज में बालिकाओं के प्रति आदर, स्नेह और सम्मान का संदेश भी देती है।
शारदीय नवरात्रि 2026 में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर से 19 अक्टूबर के बीच बताई गई है। श्रद्धालु कन्या पूजन और व्रत पारण के लिए अपने स्थानीय पंचांग तथा पारिवारिक परंपरा का अनुसरण करें। कन्या पूजन में उपहार से अधिक महत्वपूर्ण बालिकाओं का सम्मान, स्वच्छ भोजन और श्रद्धा का भाव है।



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