शुभ कार्यों से पहले जानिए तिथि, योग, ग्रहों की स्थिति और दिन के प्रमुख मुहूर्त
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। पूजा-पाठ, व्रत, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य शुभ कार्यों के लिए पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार का विचार किया जाता है। पंचांग की गणना सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय स्थितियों पर आधारित होती है।
21 अक्टूबर 2026, बुधवार के लिए उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि दोपहर 2 बजकर 12 मिनट तक बताई गई है। इसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त, अमृतकाल, राहुकाल और ग्रहों की स्थिति का भी विशेष उल्लेख किया गया है।
21 अक्टूबर 2026 का पंचांग एक नजर में
| पंचांग विवरण | समय एवं स्थिति |
|---|---|
| दिन | बुधवार |
| तिथि | शुक्ल दशमी, दोपहर 2:12 तक |
| अगली तिथि | एकादशी |
| सूर्योदय | सुबह 6:30 बजे |
| सूर्यास्त | शाम 5:52 बजे |
| चंद्रोदय | दोपहर 2:50 बजे |
| चंद्रास्त | रात 2:33 बजे (अगले दिन) |
| योग | गंड योग, रात 12:32 तक |
| सूर्य राशि | तुला |
| चंद्र राशि | सुबह 7 बजे के बाद कुंभ में प्रवेश |
अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल कब रहेगा?
उपलब्ध विवरण के अनुसार बुधवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:40 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक बताया गया है। हिंदू ज्योतिषीय परंपरा में अभिजीत मुहूर्त को शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसी तरह अमृतकाल सुबह 8:37 बजे से 10:20 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमृतकाल को पूजा-पाठ और अन्य मंगलकारी कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
हालांकि किसी विशेष कार्य के लिए मुहूर्त निर्धारित करते समय स्थानीय पंचांग और संबंधित धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए।
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का समय
पंचांग में कुछ समयावधियों को पारंपरिक रूप से नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुपयुक्त माना जाता है। बुधवार के लिए उपलब्ध विवरण में इनका समय इस प्रकार दिया गया है।
| काल | समय |
|---|---|
| राहुकाल | दोपहर 12:11 से 1:36 बजे |
| यमगंड | सुबह 7:55 से 9:20 बजे |
| गुलिक काल | सुबह 10:46 से दोपहर 12:11 बजे |
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार राहुकाल और यमगंड में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। पहले से चल रहे कार्य सामान्य रूप से जारी रखे जा सकते हैं। इन समयों की गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर होती है, इसलिए स्थान के अनुसार इनमें अंतर संभव है।
चित्रा नक्षत्र में सूर्य की स्थिति का ज्योतिषीय महत्व
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार सूर्य चित्रा नक्षत्र में स्थित बताए गए हैं। ज्योतिषीय परंपरा में चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल माना जाता है।
ज्योतिषीय व्याख्याओं में सूर्य और मंगल के संबंध को आत्मविश्वास, साहस, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता से जोड़ा जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार प्रशासनिक और प्रबंधन से जुड़े कार्यों में इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि किसी व्यक्ति के करियर या पदोन्नति पर इसके प्रभाव को निश्चित परिणाम के रूप में नहीं देखा जा सकता।
गंड योग का क्या है अर्थ?
बुधवार को गंड योग रात 12:32 बजे तक बताया गया है। पारंपरिक ज्योतिष में गंड योग को चुनौतीपूर्ण योगों में गिना जाता है।
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में इस योग को कार्यों में सावधानी और संयम रखने से जोड़ा जाता है। हालांकि किसी व्यक्ति के स्वभाव, स्वास्थ्य या जीवन की घटनाओं का वैज्ञानिक रूप से इस योग के आधार पर निर्धारण नहीं किया जा सकता।
तुला राशि में सूर्य, कुंभ में चंद्रमा का प्रवेश
उपलब्ध विवरण के अनुसार 21 अक्टूबर को सूर्य तुला राशि में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में तुला राशि सूर्य की नीच राशि मानी जाती है।
ज्योतिषीय मान्यताओं में सूर्य के साथ बुध और शुक्र की स्थिति को विभिन्न योगों से जोड़कर देखा जाता है। इनकी व्याख्या अलग-अलग राशियों के लिए अलग हो सकती है।
वहीं, चंद्रमा के सुबह 7 बजे के बाद कुंभ राशि में प्रवेश करने की जानकारी दी गई है। ज्योतिषीय परंपरा में कुंभ राशि का संबंध शनि से माना जाता है और इसे तर्कशीलता तथा विचारशीलता जैसे गुणों से जोड़ा जाता है।
बुधवार को दिशाशूल किस दिशा में?
दिए गए विवरण के अनुसार बुधवार को उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा में दिशाशूल बताया गया है। पारंपरिक मान्यता में दिशाशूल का विचार यात्रा के शुभ-अशुभ समय से जुड़ा है।
हालांकि वास्तविक यात्रा की योजना बनाते समय मौसम, यातायात, सुरक्षा और आवश्यक परिस्थितियों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
21 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध विवरण के अनुसार दशमी तिथि दोपहर तक, अभिजीत मुहूर्त पूर्वाह्न में और राहुकाल दोपहर में रहेगा। धार्मिक कार्यों के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय का मिलान करना उचित होगा।
नोट: पंचांग के समय स्थान, गणना-पद्धति और सूर्योदय के अनुसार बदल सकते हैं। यहां दिए गए समय प्राप्त विवरण पर आधारित हैं। ज्योतिषीय प्रभाव धार्मिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से स्थापित भविष्यवाणियां नहीं।



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