अंकिता भंडारी हत्याकांड: 88 दिनों में पूरी हुई थी जांच, तीनों दोषियों को उम्रकैद
उत्तराखंड पुलिस के एडीजी ने दी जांच और अदालती कार्रवाई की जानकारी, 500 पन्नों की चार्जशीट हुई थी दाखिल
देहरादून (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में पुलिस की जांच और अदालती कार्रवाई को लेकर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) वी. मुरुगेसन ने गुरुवार को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस ने घटना के 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 88 दिनों में जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल, तकनीकी, फोरेंसिक और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत में अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
- घटना की तारीख: 18 सितंबर 2022
- शव बरामद: 24 सितंबर 2022, चिल्ला नहर
- गिरफ्तारी: पुलिस के अनुसार, घटना के 24 घंटे के भीतर तीन आरोपी गिरफ्तार
- जांच एजेंसी: विशेष जांच दल (SIT)
- जांच अवधि: 88 दिन
- आरोपपत्र: लगभग 500 पन्ने
- अदालत का फैसला: 30 मई 2025
- सजा: तीनों दोषियों को आजीवन कारावास
24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी
देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए एडीजी वी. मुरुगेसन ने बताया कि लक्ष्मण झूला थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में कार्यरत अंकिता भंडारी से जुड़ी घटना सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की थी।
उन्होंने कहा कि मामले में तीन व्यक्तियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई के साथ ही घटनाक्रम की विस्तृत जांच शुरू की और आरोपियों से पूछताछ की।
एडीजी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्ति बाद में अदालत से दोषी ठहराए गए और वर्तमान में जेल में अपनी सजा काट रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित हुई थी एसआईटी
मुरुगेसन ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेष जांच दल का गठन किया गया था।
जांच की निगरानी और प्रभावी संचालन के लिए डीआईजी रैंक की एक महिला आईपीएस अधिकारी को एसआईटी का नेतृत्व सौंपा गया। पुलिस के मुताबिक, इसका उद्देश्य मामले से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना था।
एसआईटी ने घटनास्थल, संबंधित व्यक्तियों और उपलब्ध तकनीकी जानकारी के आधार पर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।
डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों पर आधारित रही जांच
एडीजी ने बताया कि विशेष जांच दल ने जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फोरेंसिक और भौतिक साक्ष्यों को एकत्र किया। आरोपियों से विस्तृत पूछताछ के साथ गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए।
जांच अधिकारियों ने उपलब्ध फोरेंसिक रिपोर्टों और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का विश्लेषण किया। पुलिस के अनुसार, इन साक्ष्यों को घटनाक्रम से जोड़कर आरोपपत्र तैयार किया गया।
डिजिटल रिकॉर्ड, तकनीकी साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट, भौतिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई गई।
88 दिनों में जांच पूरी, करीब 500 पन्नों की चार्जशीट
उत्तराखंड पुलिस के अनुसार, एसआईटी ने 88 दिनों के भीतर जांच पूरी करके अदालत में लगभग 500 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र प्रस्तुत किया था।
इस आरोपपत्र में जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया गया। इसके बाद मामले की न्यायिक सुनवाई आगे बढ़ी।
एडीजी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से मामले में प्रभावी अभियोजन और समयबद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे।
30 मई 2025 को अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद
मामले में कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 30 मई 2025 को अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
एडीजी मुरुगेसन के अनुसार, एसआईटी द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर अदालत में दोष सिद्ध हुआ।
1. पुलकित आर्य
2. सौरभ भास्कर
3. अंकित गुप्ता
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, तीनों दोषी वर्तमान में जेल में हैं।
18 सितंबर 2022 को हुई थी अंकिता भंडारी की हत्या
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के वनंतरा रिसॉर्ट में कार्यरत थीं। उनकी हत्या 18 सितंबर 2022 को हुई थी। छह दिन बाद, 24 सितंबर को उनका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया था।
इस घटना के सामने आने के बाद उत्तराखंड में व्यापक आक्रोश देखा गया था। मामले में न्याय की मांग को लेकर लोगों ने आवाज उठाई और पुलिस जांच पर पूरे प्रदेश की नजर बनी रही।
घटना की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल का गठन किया गया और मामले को अदालत तक पहुंचाया गया।
पुलिस ने दोहराई जांच और अभियोजन की जानकारी
गुरुवार को मीडिया के सामने एडीजी वी. मुरुगेसन ने पूरे मामले में की गई पुलिस कार्रवाई, जांच की समयसीमा और अदालत के फैसले की जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी से लेकर आरोपपत्र दाखिल करने और अदालत में अभियोजन की कार्रवाई तक पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रक्रिया पूरी की।
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के उन चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है, जिसने महिला सुरक्षा और न्यायिक कार्रवाई को लेकर व्यापक सार्वजनिक चर्चा को जन्म दिया।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में पुलिस ने 88 दिनों में जांच पूरी कर करीब 500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया था। 30 मई 2025 को कोटद्वार की अदालत ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उत्तराखंड पुलिस ने अब मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई का विवरण साझा किया है।



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