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सरकारी मनमानी की हद! आग बुझाने वाला दमकल वाहन बना पानी का टैंकर, सरकारी दफ्तर में ढो रहा पानी

September 1, 2026

जिले की नगर परिषद भुआ-बिछिया में सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस दमकल वाहन को आगजनी और आपातकालीन परिस्थितियों में जनता की जान-माल बचाने के लिए उपलब्ध रहना चाहिए, उसके तहसील कार्यालय में पानी सप्लाई के लिए उपयोग किए जाने की जानकारी सामने आई है।सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर यह मामला अब सिर्फ पानी सप्लाई का नहीं, बल्कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली, प्राथमिकताओं और जवाबदेही का सवाल बन गया है।

सवाल सीधा है—जनता के लिए खरीदा गया दमकल वाहन आग बुझाएगा या सरकारी दफ्तरों की पानी की जरूरत पूरी करेगा? जब पानी की व्यवस्था है तो दमकल क्यों? तहसीलदार बिछिया शंकर लाल मरावी का कहना है कि नगर परिषद भुआ-बिछिया द्वारा तहसील कार्यालय में लगभग हर तीन दिन में पानी की आपूर्ति की जाती है।

फिर सवाल और गंभीर हो जाता है।

जब नगर परिषद की ओर से नियमित पानी की व्यवस्था पहले से मौजूद है, तो दमकल वाहन को पानी सप्लाई के काम में लगाने की जरूरत आखिर किसने और क्यों महसूस की? क्या नगर परिषद के पास पानी पहुंचाने के लिए दूसरा वाहन नहीं है? क्या दमकल वाहन को इस काम में लगाने का कोई लिखित आदेश है? किस अधिकारी ने अनुमति दी? क्या वाहन की लॉगबुक में इस उपयोग का उल्लेख है? और अगर इसी दौरान नगर में आग लग जाती तो दमकल वाहन तत्काल उपलब्ध रहता या नहीं?

इन सवालों का जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।

अफसरों की सुविधा पहले या जनता की सुरक्षा?

वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भुआ-बिछिया में यदि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल अधिकारियों और कार्यालयों की सुविधा के हिसाब से होने लगा है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है। दमकल वाहन कोई निजी पानी का टैंकर नहीं है। यह आपातकालीन सेवा का वाहन है और इसकी उपलब्धता सीधे जनता की सुरक्षा से जुड़ी है। अगर किसी सरकारी कार्यालय की पानी की व्यवस्था के लिए दमकल वाहन लगाया जाता है, तो प्रशासन को यह बताना होगा कि किस नियम के तहत और किस सक्षम अधिकारी के आदेश से यह किया गया। कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकारी वाहन और संसाधनों को अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करने लगे हैं और नीचे से ऊपर तक किसी को इसकी परवाह ही नहीं?

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