West Bengal : रथ यात्रा पर BJP को झटका, सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इन्कार

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कोलकाता/नयी दिल्ली : पश्चिम बंगाल में अब इस साल भारतीय जनता पार्टी की रथ यात्रा निकलने के आसार नहीं दिख रहे. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बंगाल भाजपा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें पार्टी ने मामले की जल्द सुनवाई करने की अपील की थी.  कलकत्ता हाईकोर्ट की डबल बेंच के फैसले के खिलाफ भाजपा सर्वोच्च अदालत पहुंची थी.

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि उसे हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश के खिलाफ भाजपा की अपील प्राप्त हुई है. भाजपा ने अपनी विशेष अनुमति याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की है. अधिकारी ने बताया कि यह याचिका तत्काल सुनवाई के योग्य नहीं है.

ज्ञात हो कि बंगाल सरकार की याचिका पर डिवीजन बेंच ने भाजपा की रथ यात्रा पर रोक लगाते हुए मामले को फिर से सिंगल बेंच के पास भेज दिया था. इसके पहले राज्य सरकार ने रथ यात्रा की अनुमति नहीं दी, तो बंगाल भाजपा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती ने पार्टी को राज्य में ‘लोकतंत्र बचाओ रथयात्रा’ निकालने की अनुमति दे दी. कोर्ट ने भाजपा को 22, 24 व 26 दिसंबर को रथयात्रा की अनुमति दे दी थी.

इस फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी की सरकार ने डबल बेंच में अपील की. सरकार ने अपनी दलील में कहा कि रथ यात्रा से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है. इसलिए इस यात्रा को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए. सरकार ने गृह विभाग एवं पुलिस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए रथ यात्रा की अनुमति को रद्द करने की अपील की. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवाशीष कर गुप्ता और जस्टिस शंपा सरकार की पीठ ने दलीलें सुनने के बाद सिंगल बेंच के फैसले को पलट दिया. रथ यात्रा पर रोक लगा दी. अब इस फैसले के खिलाफ भाजपा ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटा दिया है.

तीन जिलों में रथ यात्रा का कार्यक्रम

भाजपा 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के तहत पश्चिम बंगाल के तीन जिलों में रथ यात्राएं आयोजित करना चाहती हैं. रथ यात्रा के माध्यम से पार्टी राज्य के 42 संसदीय क्षेत्रों में पहुंचने का प्रयास कर रही है. भाजपा के मूल कार्यक्रम के तहत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बंगाल के कूचबिहार जिले से सात दिसंबर को इस रैली की शुरुआत करने वाले थे. इसके बाद यह रथयात्रा नौ दिसंबर को दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप और 14 दिसंबर को बीरभूम में तारापीठ मंदिर से शुरू होनी थी.

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