#MeToo: सलमान की गर्लफ्रेंड सोमी अली भी हुई थीं नौकर के गंदे काम का शिकार, बोलीं – ‘5 साल की उम्र में घर पर…

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मुंबई. मी टू कैंपन के तहत सेलेब्स की कई हिला देने वाली कहानियां सामने आ रही है। दरअसल एक जमाने में सलमान खान की गर्लफ्रेंड रहीं सोमी अली ने #Metoo मूवमेंट में अपनी आहूती डाली है। ये बात वे पहले भी कुछेक बार बता चुकी हैं लेकिन अब फिर उन्होंने एक ताजा इंटरव्यू में इसे कहा है। सोमी ने बताया कि जब वे सिर्फ पांच साल की थी, तब उनका यौन शोषण हुआ था। यह हरकत उनके नौकर ने की थी। सोमी अली इन दिनों फ्लोरिडा ‘नो मोर टियर्स’ नाम की संस्था चलाती हैं, जो असहाय महिलाओं की सहायता करती है। सोमी की इस संस्था को बने हुए 27 मार्च को 10 साल हो गए।

सोमी अली की बॉलीवुड में पहचान सलमान खान गर्लफ्रेंड के रूप में बनी थी। नब्बे के दशक में यह हॉट पाकिस्तानी एक्ट्रेस मुंबई आ गई थीं। सोमी का जन्म 25 मार्च, 1976 को पाकिस्तान के कराची में हुआ। सोमी जब बहुत छोटी थीं , तभी सलमान खान के प्रति आकर्षित हो गईं। उन्होंने मुंबई आकर अपनी फिल्मी पारी की शुरुआत की। इसी दौरान उन्हें अपने से दस साल बड़े सलमान खान से प्यार हो गया। सलमान-सोमी का रोमांस पूरे आठ साल तक चला। लेकिन साल 2000 में दोनों की राहें जुदा हो गई और सोमी इसके बाद फ्लोरिडा चली गईं।

सोमी ने साल 2006 में ‘नो मोर टियर्स’ नाम से एक संस्था बनाई जो घेरलू हिंसा और उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की सहायता करती है। सोमी अली ने बताया ‘मैं पाकिस्तान में बचपन में ऐसे माहौल में बड़ी हुई जहां घरेलू हिंसा सामान्य बात है। आए दिन वहां महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा होती रहती है। जब भी मैं अपनी मम्मी से उनके चोट के निशानों के बारे में पूछती, तो वह कहती कि सीढ़ियों से गिर गई थीं। आमतौर पर हर देश में महिलाएं घरेलू हिंसा पर इसी तरह पर्दा डाल देती हैं। यही वजह थी कि मैंने ‘नो मोर टियर्स’ संस्था बनाने के बारे में सोचा।’

सोमी ने बताया कि सिर्फ उनकी मां ही नहीं वे भी बचपन में यौन उत्पीड़न के दर्द से गुजर चुकी हैं। उन्होंने बताया ‘बचपन में मैंने भी यौन उत्पीड़न का दर्द झेला है। मैं जब सिर्फ पांच साल की थी, तो मेरा यौन उत्पीड़न हुआ था। इस दर्द को मैं कभी भुला नहीं पाई। इसलिए जब कभी मुझे स्कूल या यूनिवर्सिटी में बुलाया जाता तो मैं अपनी जिंदगी के इस स्याह पक्ष को जरूर बच्चों के साथ बांटती हूं। ताकि अगर उनके साथ कुछ ऐसा हो, तो वे दूसरों को बता सकें। उन्हें ये बातें बताते हुए झिझक महसूस न हो।’

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