द्रोणाचार्य अवार्डी राष्ट्रीय कुश्ती कोच यशवीर सिंह का निधन

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ओलम्पिक पदक विजेता पहलवानों सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त की कामयाबी में अहम् भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय कुश्ती कोच और द्रोणाचार्य अवार्डी यशवीर सिंह का निधन हो गया है। वह 54 वर्ष के थे। यशवीर के परिवार में पत्नी, पुत्र और पुत्री है। वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनका राजधानी के एक अस्पताल में गुरूवार शाम को निधन हो गया। यशवीर के निधन पर कुश्ती जगत ने गहरा शोक जताया है। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को गांव माजरा डबास में सुबह नौ बजे किया गया।  महाबली सतपाल, द्रोणाचार्य अवार्डी रामफल और महासिंह राव, ओलम्पिक पदक विजेता पहलवान सुशील और योगेश्वर, अर्जुन अवार्डी राजीव तोमर और रणवीर सिंह ढाका अंतिम संस्कार में मौजूद थे।

सुशील के वर्ष 2010 में विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद 2010 में ही अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती महासंघ ने यशवीर को सर्वश्रेष्ठ कोच के अवार्ड से नवाजा था। यशवीर को दूसरे सहारा इंडिया खेल पुरस्कारों के लिए वर्ष 2010 में ही सर्वश्रेष्ठ कोच पुरस्कार दिया गया था। सरकार ने 2012 में यशवीर को द्रोणाचार्य अवार्ड प्रदान किया था। यशवीर ने लम्बे समय तक छत्रसाल स्टेडियम अखाड़े में महाबली सतपाल के मार्गदर्शन में काम किया था। सतपाल ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा, “हमारे अखाड़े के द्रोणाचार्य अवार्डी कोच यशवीर का निधन हो गया है। उनके निधन से कुश्ती जगत को गहरा आघात पहुंचा है। दुःख की इस घड़ी में हम सभी उनके परिवार के साथ हैं। यशवीर बेहद मेहनती थे और मेरे साथ करीब 25 साल तक रहे।”

उन्होंने फ्री स्टाइल कुश्ती कोचिंग में करीब तीन दशक गुजारे थे और सुशील के लगातार दो ओलम्पिक  पदक (2008, 2012) और 2010 में विश्व चैंपियन बनने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।  उनसे प्रशिक्षण प्राप्त पहलवानों ने ओलम्पिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों के अलावा अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीते। इन पहलवानों में सुशील, योगेश्वर, रविंद्र कुमार, अमित कुमार, रजनीश, राहुल अवारे , अमित धनखड़ आदि शामिल हैं।इंदौर के अर्जुन अवार्डी पहलवान कृपाशंकर बिश्नोई ने शोक प्रकट करते हुए कहा कि यह कुश्ती खेल के लिए बहुत बड़ी क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।

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