भाकपा के स्तंभ माने जाने वाले और छह बार विधायक रहे अंबिका प्रसाद का निधन

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भागलपुर। बिहार में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(भाकपा) के स्तंभ माने जाने वाले और छह बार विधायक रहे अंबिका प्रसाद का कल देर रात भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड के बरोहिया गांव स्थित पैतृक घर पर निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। अंबिका प्रसाद काफी समय से बीमार चल रहे थे। वह अपने पीछे पत्नी तथा चार पुत्र एवं एक पुत्री को छोड़ गए। प्रसाद ने वर्ष 1957 से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करते हुए पीरपैती विधानसभा क्षेत्र से भाकपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और विधायक बने थे।

इसके बाद वह लगातार 1980 तक पार्टी के विधायक रहे। हालांकि इसके बाद वह दो बार चुनाव हार गए थे और पुन: 1990 से 2000 तक दो बार पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। प्रसाद ने अपने राजनीतिक सफर में पीरपैती क्षेत्र से छह बार प्रतिनिधित्व करते हुए समर्पित पार्टी नेता के रुप में अपने क्षेत्र के अलावा भागलपुर जिले के गरीबों एवं असहायों को हक दिलाने और उनके सुख-दुख का भागीदार बनने का काम किया। एक किसान परिवार में जन्मे प्रसाद ने भागलपुर में एम.ए. और एलएलबी की पढाई की थी।

उनके सहपाठी रहे प्रो. शारदा प्रसाद साह ने उन्हें छात्रजीवन से ही गरीबों का हमदर्द एवं सच्चा साथी बतलाया है। इस बीच कांग्रेस विधायक दल के नेता एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह ने उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हुए कहा कि वे काफी अनुभवी, जमीनी एव गरीबों के नेता थे। उनकी सादगी एवं अच्छाईयों को भुलाया नहीं जा सकता है। राजनीतिक क्षेत्र में प्रसाद से व्यक्तिगत संबंध रहा है और उनके निधन से काफी क्षति हुई है। भागलपुर क्षेत्र के सांसद शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, पीरपैती क्षेत्र के राजद विधायक रामविलास पासवान, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य डा. शंभुदयाल खेतान ने भी प्रसाद के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

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