कर्ज की ऊंची लागत, कमजोर रुपये से भारतीय उद्योग जगत प्रभावित

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नई दिल्ली : बैंकों के कर्ज की लागत बढ़ने से भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए लोन लेना महंगा हो गया है, जिससे औद्योगिक उत्पादन और घरेलू मांग में सुधार पर असर पड़ रहा है. एक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है. डन एंड ब्रैडस्ट्रीट की रिपोर्ट के अनुसार कर्ज की ऊंची लागत और रुपये में कमजोरी से कंपनियों पर असर पड़ने की संभावना है. वहीं वैश्विक बाजार की अनिश्चितता में वैश्विक वृद्धि की कहानी को पटरी से उतारने की क्षमता है.

डन एंड ब्रैडस्ट्रीट इंडिया के लीड अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा कि बैंकों की ऋण दर बढ़ने की वजह से कंपनियों के कर्ज की लागत बढ़ रही है. कमजोर रुपये की वजह से भी स्थिति खराब हुई है. सिंह ने कहा कि ऋण की ब्याज दर बढ़ने से औद्योगिक उत्पादन तथा घरेलू मांग में सुधार पर असर पड़ सकता है. इस बीच, हेजिंग की लागत बढ़ी है और डॉलर में कर्ज महंगा हुआ है.

डन एंड ब्रैडस्ट्रीट का अनुमान है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में 3.7 से 3.9 प्रतिशत के दायरे में रहेगी, जबकि थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 4.8 से 5 प्रतिशत के दायरे में रहेगी.

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